Happy Mothers Day 2020 Poems
मातृ दिवस कविताएँ । Best Mother’s Day Poems in Hindi : Mkstatus         मातृ दिवस कविताएँ । Best Mother’s Day Poems in Hindi : Mkstatus 

मातृ दिवस कविताएँ । Best Mother’s Day Poems in Hindi : Mkstatus

Mother’s Day Poems in Hindi

Mother’s Day is celebrated on various days in many parts of the world, most commonly in the months of March or May. It is a celebration honoring the mother of the family, as well as motherhood, maternal bonds, and the influence of mothers in society. Here is the collection of Hindi Poems  for Mothers Day. मातृत्व के लिए खास तौर पर पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान देने के लिए मातृ दिवस कविताएँ और स्टेटस. Celebrate this Mother’s Day honoring the mother of the family with beautiful and lovely poems for mother in Hindi. Wish You a Very Very Happy Mother’s Day……

मातृ दिवस कविताएँ और स्टेटस

Mothers Day Poems

अंधियारी रातों में मुझको

थपकी देकर कभी सुलाती

कभी प्यार से मुझे चूमती

कभी डाँटकर पास बुलाती।

कभी आँख के आँसू मेरे

आँचल से पोंछा करती वो

सपनों के झूलों में अक्सर

धीरे-धीरे मुझे झुलाती।

सब दुनिया से रूठ रपटकर

जब मैं बेमन से सो जाता

हौले से वो चादर खींचे

अपने सीने मुझे लगाती।

-अमित कुलश्रेष्ठ

Mothers Day Poems

माँ की ममता करुणा न्यारी,

जैसे दया की चादर

शक्ति देती नित हम सबको,

बन अमृत की गागर

साया बन कर साथ निभाती,

चोट न लगने देती

पीड़ा अपने उपर ले लेती,

सदा सदा सुख देती

माँ का आँचल सब खुशियों की,

रंगा रंग फुलवारी

इसके चरणों में जन्नत है,

आनन्द की किलकारी

अदभुत माँ का रूप सलोना,

बिलकुल रब के जैसा

प्रेम के सागर सा लहराता,

इसका अपनापन ऐसा….

Mothers Day Poems

मेरे सर्वस्व की पहचान

अपने आँचल की दे छाँव

ममता की वो लोरी गाती

मेरे सपनों को सहलाती

गाती रहती, मुस्कराती जो

वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो

सागर सारा अश्कों में जो

हर आहट पर मुड़ आती जो

वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती

सुख की खुशबू बिखेर जाती

ममता की रस बरसाती जो

वो है मेरी माँ।

-देवी नांगरानी

Mothers Day Poems

जन्म दात्री

ममता की पवित्र मूर्ति

रक्त कणो से अभिसिंचित कर

नव पुष्प खिलाती

स्नेह निर्झर झरता

माँ की मृदु लोरी से

हर पल अंक से चिपटाए

उर्जा भरती प्राणो में

विकसित होती पंखुडिया

ममता की छावो में

सब कुछ न्यौछावर

उस ममता की वेदी पर जिसके

आँचल की साया में

हर सुख का सागर!

-बृजेशकुमार शुक्ला

Mothers Day Poems

प्यारी प्यारी मेरी माँ

प्यारी-प्यारी मेरी माँ

सारे जाग से न्यारी माँ.

लोरी रोज सुनाती है,

थपकी दे सुलाती है.

जब उतरे आँगन में धूप,

प्यार से मुझे जगाती है.

देती चीज़ें सारी माँ,

प्यारी प्यारी मेरी माँ.

उंगली पकड़ चलाती है,

सुबह-शाम घुमाती है.

ममता भरे हुए हाथों से,

खाना रोज खिलाती है.

देवी जैसी मेरी माँ,

सारे जाग से न्यारी माँ….

Mothers Day Poems

घुटनों से रेंगते-रेंगते,

कब पैरों पर खड़ा हुआ,

तेरी ममता की छाँव में,

जाने कब बड़ा हुआ..

काला टीका दूध मलाई

आज भी सब कुछ वैसा है,

मैं ही मैं हूँ हर जगह,

माँ प्यार ये तेरा कैसा है?

सीधा-साधा, भोला-भाला,

मैं ही सबसे अच्छा हूँ,

कितना भी हो जाऊ बड़ा,

“माँ!” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ..

Mothers Day Poems

हज़ारों दुखड़े सहती है माँ

फिर भी कुछ ना कहती है माँ।

हमारा बेटा फले औ’ फूले

यही तो मंतर पढ़ती है माँ।

हमारे कपड़े कलम औ’ कॉपी

बड़े जतन से रखती है माँ।

बना रहे घर बँटे न आँगन

इसी से सबकी सहती है माँ।

रहे सलामत चिराग घर का

यही दुआ बस करती है माँ।

बढ़े उदासी मन में जब जब

बहुत याद में रहती है माँ।

नज़र का कांटा कहते हैं सब

जिगर का टुकड़ा कहती है माँ।

मनोज मेरे हृदय में हरदम

ईश्वर जैसी रहती है माँ।

-मनोज ‘भावुक’

Mothers Day Poems

क्या सीरत क्या सूरत थी

माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने

अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में

एक अहम ज़रूरत थी

सच कहते हैं माँ हमको

तेरी बहुत ज़रूरत थी

-मंगल नसीम

Mothers Day Poems

माँ प्यारी माँ

कोशिश की थी कविता लिखने की

बरसों पहले छोटी-सी आयु में

सीख रहा था छंद कोई पंक्ति बन रही थी

‘माँ, प्यारी माँ’

तेरे ऋण है मुझ पर हज़ार

बढ़ न सका आगे उलझनों में रह गया

बढ़ रहा हूँ आज

माँ प्यारी माँ

तीरथ करती हो करते रहना

पुण्य करती हो करते रहना

छत है तेरे पुण्यों की

करेगी रक्षा हम बच्चों की

माँ प्यारी माँ

-अश्विन गांधी

Mothers Day Poems

माँ

चूल्‍हे की आग में खुद को तपाती हुई

बच्चे की ग़लतियाँ ममता में भुला रही है

दूध रोटी से लेकर, मंदिर के घंटे तक

स्नेह की चाशनी में, बचपन घुला रही है

बारिश के मौसम में, अंदर से गीला होकर

बच्चे को बचाकर खुद को सिला रही है

बिगड़ ना जाए वो, कुछ ऐसा ही सोचे

उसे डाँटकर माँ खुद को रुला रही है

अंधेरा है आगे, कहीं डर ना जाए बच्चा

कतरा कतरा माँ खुद को जला रही है

बहुत खेल चुके, अब शाम हो गयी है

आ जाओ पास माँ तुम्हे बुला रही है..!

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